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- Jan 02, 2026
- Health
वात-पित्त-कफ को संतुलित करने के आयुर्वेदिक उपाय
वात-पित्त-कफ के प्रमुख लक्षण और समाधान
क्या आप गैस, एसिडिटी, जोड़ों के दर्द, खांसी या बार-बार बीमार पड़ने से परेशान हैं?
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में होने वाले अधिकतर रोग वात, पित्त और कफ — इन तीन दोषों के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं।
इस लेख में हम जानेंगे:
- वात, पित्त और कफ क्या हैं
- इनके प्रमुख लक्षण और कारण
- घरेलू व प्राकृतिक उपाय
- किन परहेज़ों का पालन ज़रूरी है
आयुर्वेद में त्रिदोष सिद्धांत क्या है?
मानव शरीर तीन दोषों से बना है:
- वात (Gas / वायु) – लगभग 80 प्रकार के रोग
- पित्त (Acidity / अग्नि) – लगभग 40 प्रकार के रोग
- कफ (Cough / श्लेष्मा) – लगभग 28 प्रकार के रोग
जब ये तीनों दोष संतुलन में रहते हैं, तब शरीर स्वस्थ रहता है। असंतुलन ही रोगों की जड़ है।
आयुर्वेद मानता है कि बड़ी आंत में गंदगी जमा होने से ही अधिकतर रोग उत्पन्न होते हैं। इसलिए आंतों की सफाई और सही दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है।
वात दोष (Gas) – लक्षण, कारण और उपचार
वात दोष के प्रमुख लक्षण
- शरीर में कहीं भी दर्द (कमर, सिर, घुटने, सीना)
- पेट दर्द, डकार आना
- चक्कर, घबराहट, हिचकी
- जोड़ों से आवाज़ आना
वात दोष के मुख्य कारण
- गैस बनाने वाला भोजन (दालें, मैदा, बेसन)
- बिना चोकर का आटा
- दूध और दुग्ध उत्पाद
- व्यायाम की कमी
- पाचन तंत्र की कमजोरी
वात दोष के आयुर्वेदिक निवारण
- अदरक: सोंठ आधा चम्मच रात को गुनगुने पानी के साथ
- लहसुन:
- सर्दियों में 2-2 कली सुबह-शाम
- गर्मियों में 1-1 कली
- मेथीदाना: गैस और सूजन में लाभकारी
- लहसुन को सब्जी, चटनी या जूस में कच्चा मिलाकर लें
प्राकृतिक उपचार
- गर्म-ठंडी सिकाई (अंग की स्थिति अनुसार)
- रोज़ हल्का व्यायाम और पेट साफ रखने की आदत
कफ दोष (Cough) – लक्षण, कारण और उपचार
कफ दोष के लक्षण
- नाक-मुंह से बलगम
- सर्दी, खांसी, दमा
- सांस फूलना, सीढ़ी चढ़ने में थकान
कफ दोष के कारण
- अधिक तेल-चिकनाई वाला भोजन
- दूध व ठंडी चीज़ें
- धूल-धुएं में रहना
- धूप न लेना
कफ दोष के निवारण
- आंवला (Vitamin C) – कफ को बाहर निकालने में सहायक
- अदरक और लहसुन – श्रेष्ठ कफनाशक
- नियमित धूप सेवन
प्राकृतिक उपचार
- गुनगुने नमक पानी से गरारे
- गुनगुने पानी में पैर डुबोकर बैठना
- रोज़ 30–60 मिनट धूप
पित्त दोष (Acidity) – लक्षण, कारण और उपचार
पित्त दोष के लक्षण
- पेट में जलन, खट्टी डकार
- पेशाब या मल त्याग में जलन
- त्वचा में जलन, भारीपन
- BP, शुगर, मोटापा, अर्थराइटिस
पित्त दोष के कारण
- तीखा, खट्टा, ज्यादा नमक-चीनी
- चाय, कॉफी, शराब, सिगरेट
- मांस, अंडा, मछली
- तनाव, क्रोध, चिंता
- मल-मूत्र वेग रोकना
पित्त दोष के आयुर्वेदिक उपाय
- फटे दूध का पानी (छाछ जैसा)
- फल-सब्जियों के रस:
- अनार
- लौकी
- पत्ता गोभी
- नींबू पानी
प्राकृतिक उपचार
- पेट और रीढ़ पर ठंडी पट्टी
- योग और हल्का व्यायाम
- गहरी और पर्याप्त नींद
निष्कर्ष: स्वस्थ जीवन के लिए त्रिदोष संतुलन ज़रूरी
वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाए रखना ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य की कुंजी है।
सही भोजन, नियमित दिनचर्या, प्राकृतिक उपाय और मानसिक शांति से कई समस्याओं से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य आयुर्वेदिक जानकारी पर आधारित है। किसी भी गंभीर या पुरानी बीमारी में डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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